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परिचय

नगर पालिका परिषद् मऊनाथ भंजन (मऊ) उत्तर प्रदेश का एक प्रगतिशील एवं विकासोंन्मुख नगर है। मऊ का ज्ञात अभिलेखीय इतिहास लगभग 1500 वर्ष पुराना है जब यह समूचा इलाका बहुत बड़ा घना जंगल था। यहां बहने वाली तमसा नदी के आस-पास जंगली व आदिवासी जातियां निवास करती थीं।

यहां के सबसे पुराने निवासी नट माने जाते हैं। इस इलाके पर उन्हीं का शासन भी था, तमसा तट पर हजारों वर्ष पूर्व से बसे इस इलाके में लगभग सन् 1028 के आस पास बाबा मलिकताहिर का आगमन हुआ जो एक सूफी सन्त थे।

बाबा मलिकताहिर अपने भाई मलिक कासिम की फौजी टुकडी के साथ यहां आये थे, इन लोगों को तत्कालीन हुक्मरां सैयद सालार मसऊद गाज़ी ने यहां इस इलाके पर कब्जा करने के लिए भेजा था उन दिनांे इस क्षेत्र में महो नट का शासन था।

कब्जे को लेकर महो नट एवं मलिक बन्धुओं के बीच भीषण युद्ध हुआ जिसमें महो नट का भंजन हुआ और इस क्षेत्र का नाम महो नट भंजन पड़ा जो कालान्तर में मऊनाथ भंजन हो गया। मऊ नाम को लेकर कई विचार सामने आते हैं,

कुछ विद्वान इसे संस्कृत शब्द ’’मयूर’’ का अपभ्रंश मानते हैं तो कुछ इसे टर्की भाषा का शब्द मानते हैं। टर्की में ‘मऊ’ शब्द का अर्थ है पड़ाव या छावनी। मलिक बन्धुओं के नाम से कई मुहल्ले आबाद हुए जैसे मलिक ताहिर पुरा, कासिम पुरा, मलिक टोला आदि।

कहा जाता है कि 1540-1545 ई0 के मध्य इस क्षेत्र में शेर शाह सूरी का आगमन हुआ था शेर शाह सूरी सूफी सन्त मीर शाह से मिलने आया था। मऊ नगर का पुराना पुल जो 1956 की बाढ़ में धरासायी हो गया था उसे शेर शाह सूरी ने ही बनवाया था। सन 1629 में मुगल बादशाह शाहजहां के शासन काल में यह इलाका उनकी लड़की जहां आरा को मिला।

जहां आरा बेगम ने यहां मुहल्ला कटरा में अपना आवास एवं शाही मस्जिद का निर्माण करवाया और उसकी सुरक्षा के लिए फौजी छावनी में तब्दील कर दिया गया। फौज को रहने के लिए बनायी गयी बैरकों के अवशेष आज भी विद्यमान हैं। उनके बैरकों में आज खच्चरों पर सामान लादकर ले आने वाले लोधी परिवार आज भी रहते हैं। जहां आरा ने शाही कटरा क्षेत्र में एक भूमिगत सुरंग भी बनवाया था।

मुगल परिवार के साथ मजदूर कारीगर व अन्य प्रशिक्षित श्रमिक भी आये थे जिन्होंने बुनाई कला को जन्म दिया जो आज भी मुख्य व्यवसाय साड़ी बुनाई के रुप में दिखाई देता है। यहां की भाषा निराली है, यहां आये अधिकांश दस्तकार ईरानी, अफगानी और तुर्की मुल्क के थे जिनकी मिश्रित भाषाओं को यहां की बोल चाल में उपयोग किया जाती है। यहां पर अत्यन्त प्राचीन माँ शीतला मन्दिर भी है जहां पर नवरात्रि में दूर दूर से लोग दर्शन को आते हैं। पूर्व में मऊ नगर आजमगढ़ जनपद के अन्तर्गत आता था। नगर वासियों के मांग पर 19 नवम्बर 1988 को जनपद मऊ का सृजन हुआ, जो विकास के पथ पर अग्रसर है।

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